ग्राफिक आर्ट | Graphic Art | छापा काला

 इंग्रेविंग | धातु में सीधे खोदना

इस क्रिया में कलाकार अकेले औजारों से जस्ते या पीतल की बनी चादर पर खुदाई का कार्य करता है जो छपने पर सीधी दिखाई देती है कठोर धातु में उपकरणों की सहायता से खोदने में आवेग की अधिकता होती है तथा लयात्मक ता की कमी होती है इसलिए इस कार्य मैं अत्यधिक योग्यता और परिश्रम आवश्यकता होती है जो औजार लकड़ी को खोदने मैं प्रयोग किए जाते हैं धातु की प्लेट को खोदने मैं भी उन्हीं औजारों का प्रयोग किया जाता है.

Print Making | छापने की क्रिया

कागज का आकार प्लेट से काफी बड़ा होना चाहिए जिससे छापे के चारों ओर पर्याप्त जगह बनी रहे। चांपा चित्र बनाने के लिए काônगज को नम किया जाता है। वांछित आकार के टुकड़े फैले हुए बर्तन में पानी में डाल दिए जाते हैं पानी में डूबे रहने के 20 मिनट बाद कागज को निकालकर ब्लोटिंग पेपर के बीच में रख देते हैं तथा अतिरिक्त पानी सुखा देते हैं। इस तरह से कई कार्यों को एक साथ नाम रखा जा सकता है इसके लिए इन्हें प्लास्टिक की सीटों के बीच में दबाकर रखते हैं। इसके बाद प्लेट पर गहराई में अंगूठे से कुछ दबाव के साथ स्याही भरी जाती है तथा प्लेट को गर्म कर लेते हैं इससे स्याही की तरलता बढ़ जाती है शाही लगाने के बाद अखबार के टुकड़े को प्लेट पर रखते हैं और हथेली के हल के दबाव के साथ सत्य की स्याही को  पूछते हैं प्लेट की सतह को भी साफ कर लेते हैं। इस पर हल्का सा चौक पाउडर फेर लेने से इसकी चमक बढ़ जाती है। प्रेस मशीन पर स्याही लगी हुई प्लेट को रखकर कागज के आकार पर चढ़ने लगा लेना चाहिए जिससे प्रत्येक बार छापे में चारों ओर समान रूप से कागज छूटता जाए। प्लेट पर नाम किया हुआ कागज रखकर मशीन के नंबर दे को फैलाकर मशीन को चलाना चाहिए। कागज को उठाते समय ध्यान रखना चाहिए कि वह धातु की प्लेट से रगड़ना खा जाए। प्रिंट को ब्लोटिंग पेपर की तहो के बीच में किसी चौकोर वस्तु से दबाकर रखना चाहिए जिससे कागज सूखने के बाद सिकुड़ना जाए।

प्लेन ओ ग्राफी | लिथोग्राफ | सपाट सत्य द्वारा छपाई 

इस विधि में धातु की सीट या पत्थर पर अंकन किया जाता है जो पॉजिटिव आकृति के रूप में छपाई के काम आता है। लिथोग्राफी के लिए प्रयुक्त पत्थर एक रंद्र युक्त चूने का पत्थर होता है। इस पत्थर पर ग्रीस इंक से डिजाइन बनाकर पूरे पत्थर पर पानी फैला दिया जाता है इसके बाद रोलर से पत्थर पर प्रिंटिंग चाहिए लगाई जाती है और दाब के साथ प्रेस में कागज पर इसका छापा लेते हैं। प्रत्येक बार पानी लगाकर रोलर से इंक लगाना आवश्यक होता है। इस पद्धति में जैसी डिजाइन पत्थर पर अंकित की जाती है उसकी उल्टी छपती है। इस प्रकार यदि कोई भाषा पत्थर पर लिखी जाएगी तो उसके अक्षर उल्टे हो जाएंगे। इसलिए पत्थर पर उल्टा नेगेटिव बनाने के लिए एक और पद्धति का सहारा लिया जाता है। सबसे पहले कागज पर रंगीन ले ही को सपाट फैलाकर एक विशेष प्रकार से सीधी डिजाइन या शब्दावली अंकित की जाती है। इस कागज पर पत्थर को उल्टा रखकर पत्थर को प्रेस में कई बार निकाल देते हैं जिससे कागज पत्थर पर चिपक जाता है और स्याही से बनी आकृति कागज पर फिक्स हो जाती है  पत्थर की गीली स्थिति मैं इंक लगा हुआ रोलर फेरने पर केवल पहले से अंकित आकृति ही सही पकड़ती है और इस प्रकार कागज रखकर प्रेस में निकालने से मूल आकृति जैसा छापा मिल जाता है।

Intaglio 

इसकी दो प्रमुख विधियां हैं नंबर 1 इचिंग नंबर दो ड्राइप्वाइंट इंग्रेविंग इन दोनों में ही धातु की प्लेट की आवश्यकता होती है।

यह एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें धातु की पेट में वह भाग गहरे को दे जाते हैं जिसमें स्याही भरकर छापना होता है खुदाई की यह प्रक्रिया यंत्रों द्वारा इंग्रेविंग या तेजाब द्वारा इचिंग की जाती है खुदी हुई प्लेट पर स्याही लगाकर इस प्रकार पहुंच दी जाती है की गहराई में लगी हुई से ही बनी रहे जब इस पर दबाव के साथ कागज लगाया जाता है तब कागज गहराई में जाकर सही को सोख लेता है वैसे तो तांबे की प्लेट काम में लाई जाती है लेकिन जस्ता steal एल्युमिनियम की भी प्लेट प्रयोग कर सकते हैं

तेजाब द्वारा तांबा एक जैसा कट जाता है। मुलायम होने के कारण एक छापा चित्रकार अपने औजारों से स्वयं ही खोज सकता है स्टील की प्लेट कठोर होती है जिंक की प्लेट पर कार्य करना तो सरल होता है किंतु जल्दी ही खराब हो जाती है एल्युमिनियम कोमल होता है लेकिन रंगों के साथ इसकी रासायनिक क्रिया नहीं होती। सभी सीटों को सुरक्षित रखने के लिए ग्रीस लगाकर इन्हें प्लास्टिक की सीट में लपेट कर रखना चाहिए। कार्य करने से पहले सीट को चौक पाउडर और अमोनिया से बहुत अच्छे से धो लेते हैं। तीन तरह के तेजाब का गोल उपयोग में लाया जाता है नाइट्रिक एसिड का गोल तेजी से कटता है। हाइड्रोक्लोरिक एसिड अधिक सुरक्षित रहता है। क्लोराइड सबसे धीमी गति से काटता है किंतु इसकी कटी रेखा अत्यंत बारिश होती है।

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