राजकुमारियों के साथ दी जाने वाली दासियों का विवाह किसके साथ होता था?

राजकुमारियों के साथ दी जाने वाली दासियों का विवाह किसके साथ होता था?

दासी प्रथा राजस्थान में बहुत लंबे समय से थी और बहुत ही व्यवस्थित प्रथा थी। उनकी शादी कैसे होती थी ये बताता हूं , किसी राजकुमारी के साथ में सादी में जो दासिया आती थी उनका विवाह पहले वाली पीढ़ी (सास) के साथ आयी हुई दासी के बेटों के साथ कर दिया जाता था। और अपने घर की राजकुमारी की सादी जहां की जाती उसमे पहले पीढ़ी वाली दासी की बेटी को भेज दिया जाता था, उस दासी की सादी की जिम्मेदारी बेटी के ससुराल वाले अपनी दासी की बेटी से करवा देते थे।

दूसरे शब्दों में जब राजकुमार की शादी होती तो राजकुमारी के साथ अाई दासी की सादी राजकुमार की मा के साथ अाई हुई दासी के बेटे के साथ कर दिया जाता था। और राजकुमारी की सादी में साथ में गई दासियों की सादी की जिम्मेदारी उसके ससुराल पक्ष की होती थी।

इस व्यवस्था में दास और दासी के भरण पोषण के अलावा उनके बेटे और बेटियों की शादी अपनी बेटे बेटियों के साथ की साथ में ही करवाना राजपरिवरों की जिम्मेदारी होती थी।

राजस्थान के कुछ जगहों पर ये अभी भी होता है , लेकिन अभी राजपूत समाज के पास इतने भी संसाधन नहीं है कि वो दास परिवार की परवरिश और शादी की जिम्मेदरियां उठा सके तो अब यह प्रथा बंद हो गई है।

वैसे मूल दास परिवारों की तुलना अंग्रेजी गुलामी से नहीं की जा सकती क्यूकी इसमें पूरे परिवार का भरण पोषण, रहन व्यवस्था, शादी व्यवस्था और अन्य पूरा खर्च अच्छे से उठाना राजपरिवरों की पूरी जिममेदारी हुआ करती थी , लेकिन समय के साथ कहीं कहीं इसमें खराबी और शोषण जुड़ गए थे जिसे हर तरफ दिखाया जाता है ।

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