लोक कला का प्रभाव | Influence of Folk Art

लोक कला की जिन विशेषताओं ने आधुनिक कलाकारों को प्रभावित किया है वे निम्नलिखित हैं-

1. सरल बाह्य रेखा के प्रति आग्रह । प्रतिरूपात्मकता की प्रवृत्ति ।

2. रंगों तथा घनत्व (आयामों) का सरलीकरण। छाया का अभाव । 

3. अभिव्यंजना के उद्देश्य से मुद्राओं की अतिरंजना तथा महत्व के अनुसार वस्तुओं के आकार ।

4. अभिप्रायों अथवा रूढ रूपों को आलंकारिक ढंग से विशेष रूप देने की प्रवृत्ति । 

5. रेखाओं, आकृतियों अथवा बिन्दुओं की पुनरावृत्ति द्वारा लयात्मकता की सृष्टि । लोक कला से प्रभावित आधुनिक भारतीय कलाकार-

आधुनिक भारतीय कलाकारों में यामिनी राय कालीघाट की पट-चित्र शैली से ‘प्रभावित हुए हैं। नन्दलाल बसु तथा विनोद बिहारी मुखर्जी ने लोक-जीवन के विषयों से प्रेरणा ली है। 

सपाट द्वि-आयामी आकृति तलों को रेखा द्वारा सीमित करने की प्रवृत्ति हैब्बार, चावड़ा तथा शैलोज मुखर्जी में मिलती हैं। रथीन मैत्रा तथा नीरद मजूमदार लोक शैलियों से प्रेरित हुए हैं। इन्होंने तैल माध्यम भी अपनाया है। 

1940- 50 ई0 के मध्य दक्षिण के कुछ कलाकार आलपेलकर, राजय्य, श्रीनिवासुलु तथा पैडीराजू भी लोक कला की आकृतियों से प्रभावित हुए हैं। 

अन्य कलाकार जिनमें लोक कला की खिलौनों के समान मुद्राओं तथा आकृतियों का प्रयोग हुआ है वे हैं – जे०सुल्तान अली, लक्ष्मण पै, डी० बद्री, ज्योति भट्ट, भगवान कपूर, शीला औडेन, सतीश गुजराल, देवयानी कृष्ण, सुनील माधव सेन, ब्रदी नारायण, मकबूल फिदा हुसैन, जैराम पटेल, पी० खेमराज, निवेदिता परमानन्द, कमला मित्तल, परितोष सेन, सीतेश दास गुप्ता तथ गौतम वाघेला आदि ।

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