अनुपम सूद | Anupam Sood

अनुपम सूद का जन्म होशियारपुर में 1944 में हुआ था। उन्होंने कालेज आफ आर्ट दिल्ली से 1967 में नेशनल डिप्लोमा उत्तीर्ण किया। इसके पश्चात् कुछ समय तक पेण्टिंग भी की किन्तु धीरे-धीरे ग्राफिक माध्यम में उनकी रुचि बढ़ती चली गयी। 

उन्होनें इस माध्यम में कोलोग्राफ बनाये जिनमें विभिन्न वस्तुओं की सतह से टेक्सचर उठाकर उसे कलात्मक रूप दिया जाता है। कार्ड-बोर्ड कोलोग्राफ माध्यम के उनके प्रसिद्ध चित्र हैं’ सह अस्तित्व और जीवन एक क्रान्ति । 

इसी अवधि में उन्होंने कुछ लिथोग्राफ भी बनाये। इनमें आकृतियाँ समतल हैं। अण्डा तथा तैरता अस्तित्व उनके लिथोग्राफी के उदाहरण हैं।

1971-72 में वे ब्रिटिश काउन्सिल स्कालरशिप के अन्तर्गत स्लेड स्कूल आफ आर्ट लन्दन में छापा चित्र (प्रिण्ट मेकिंग) की शिक्षा हेतु गयीं। वहाँ उन्हें इसके उच्च तकनीक को समझनेका अवसर मिला। 

विभिन्न विधियों, माध्यमों और कलासामग्रियों के साथ उन्होंने अनेक प्रयोग किये जो उनके लिये भारत में सम्भव नहीं थे। वहाँ से लौटने पर उन्होंने अनेक ग्राफिक कार्यशालाओं में भाग लिया और अनेक प्रदर्शनियों की। 

उन्हें ललित कला अकादमी का 1973 में राष्ट्रीय पुरस्कार, 1975 में राष्ट्रपति का स्वर्ण पदक, 1971 तथा 1975 में आल इण्डिया फाइन आर्ट्स सोसाइटी का पुरस्कार तथा अन्य अनेक पुरस्कार प्राप्त हुए उनकी नियुक्ति कालेज आफ आर्ट नई दिल्ली में ग्राफिक विभाग में अध्यापिका के रूप में भी हो गयी जहाँ वे कार्य कर रहीं है ।1 वे शिल्पी चक्र तथा अन्य अनेक कला-संस्थाओं की सदस्या भी हैं।

उनके कुछ प्रसिद्ध चित्र हैं : संरचना, त्रिमूर्ति, विजेता के लिये पताका, जीवन एक क्रान्ति, बायोग्राफी आफ ए क्राइम, वे टू यूटोपिया, शिफ्टिंग हालो, डार्लिंग गेट मी ए बेबी मेड, द होमेज टू मेनकाइण्ड आदि। 

अनुपम सूद के छापा – चित्रों की एक विशेष महत्वपूर्ण बात यह है कि वे अपने चित्रों में पृष्ठ भूमि को एक पर्दे की भांति प्रयोग में लाती हैं ये ग्राफिक कलाकारों के ग्रुप 8″ की संस्थापक हैं जो ग्राफिक कलाकारों का महत्वपूर्ण भारतीय दल है।

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